दो बदन एक होने को तडप रहे थे


Antarvasna, kamukta: पापा और मैं साथ में बैठे हुए थे हम दोनों बातें कर रहे थे मां ने कहा कि गौतम बेटा तुम खाना खा लो मैंने मां को कहा हां मां मैं थोड़ी देर में खाना खा लूंगा। पापा मुझसे मेरे फ्यूचर प्लानिंग को लेकर बात कर रहे थे मैं कॉलेज में पढ़ता हूं और यह मेरे कॉलेज का आखिरी वर्ष है। पापा एक सरकारी विभाग में नौकरी करते हैं और मां घर का ही काम संभालती हैं। मैंने पापा को कहा कि मैंने अभी तक तो कुछ सोचा नहीं है। मैं एमबीए की पढ़ाई कर रहा हूं मुझे यह चिंता सता रही थी कि अगर कहीं कॉलेज प्लेसमेंट में मेरा सिलेक्शन हो नहीं पाया तो उसके बाद मेरे लिए बहुत ही मुसीबत हो जाएगी इसलिए मैं फिलहाल पापा से इस बारे में कुछ बात नहीं कर रहा था। पापा ने भी मुझे कहा कि गौतम बेटा तुम खाना खा लो और उसके बाद मैं खाना खाने के लिए चला गया और मैंने खाना खाया। पापा और मम्मी पहले ही खाना खा चुके थे क्योंकि जब उन्होंने मुझे खाने के लिए कहा था तो उस वक्त मेरा मन खाना खाने का नहीं था।

मैं पापा मम्मी के साथ बैठा हुआ था इसके बाद मैं अपने रूम में चला गया और मैं यही सोच रहा था कि मेरे फ्यूचर का क्या होगा। मेरे कॉलेज के एग्जाम खत्म हो चुके थे और हम लोगों का रिजल्ट भी आ चुका था। कुछ समय बाद हम लोगों के कॉलेज में केम्पस प्लेसमेंट आया और  मेरा सिलेक्शन उसमे हो चुका था। मैं इस बात से काफी खुश था कि मेरा सिलेक्शन कैंपस प्लेसमेंट में हो चुका है पापा और मम्मी को भी इस बारे में पता चला तो वह लोग भी काफी खुश थे। अब मुझे नौकरी करने के लिए दिल्ली जाना था दिल्ली में मैं किसी को जानता नहीं था इसलिए मेरे लिए सब कुछ नया था। मैं जब दिल्ली गया तो मैं वहां पर कुछ दिनों तक तो एक पीजी में रहा उसके बाद मैंने अपने लिए एक रूम ले लिया था। मैं जिस किराए के घर में रहता था वहां पर मनीषा भी रहती थी मनीषा से मेरी दोस्ती होने लगी थी। मनीषा भी चंडीगढ़ की रहने वाली थी और मैं भी चंडीगढ़ का रहने वाला था इस वजह से हम दोनों के बीच काफी बनने लगी थी। मनीषा भी एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करती है और वह उम्र में मुझसे बड़ी है लेकिन मुझे मनीषा का साथ बहुत अच्छा लगता है। एक दिन मनीषा का जन्मदिन था उस दिन उसने मुझे कहा कि गौतम आज मेरा बर्थडे है। मनीषा ने अपने ऑफिस के कुछ लोगों को भी पार्टी में इनवाइट किया था और हम लोग जब मनीषा की पार्टी में गए तो मुझे काफी अच्छा लगा। मैंने मनीषा को उसका बर्थडे गिफ्ट दिया तो मनीषा भी खुश हो गई।

मैं मनीषा को अब दिल ही दिल चाहने लगा था लेकिन मनीषा के दिल में क्या था यह बात मुझे मालूम नहीं थी परंतु मैं मनीषा को टटोलने की कोशिश किया करता। एक दिन मनीषा ने मुझे बताया कि वह ऑफिस में काम करने वाले रोहित को बहुत पसंद करती है। मनीषा के साथ में ही रोहित जॉब करता है यह बात सुनकर मुझे बहुत ज्यादा बुरा लगा और मैंने मनीषा से उसके बाद कभी इस बारे में नहीं पूछा। मैंने अपने दिल से भी मैंने मनीषा का ख्याल निकाल दिया था लेकिन मनीषा और मेरी दोस्ती वैसे ही थी जैसे कि पहले थी। हम दोनों एक दूसरे के साथ काफी खुश थे और मुझे मनीषा के साथ में बहुत अच्छा लगता। जब भी मैं मनीषा के साथ होता तो उसके साथ मुझे समय बिता कर बहुत ही अच्छा लगता। एक दिन मुझे अपने काम के सिलसिले में जाना था उस दिन जब मैं मुंबई गया तो मैंने मनीषा को फोन किया क्योंकि मेरा पर्स घर पर ही रह गया था। मनीषा उस वक्त घर पर ही थी तो मैंने मनीषा को कहा कि क्या तुम एयरपोर्ट पर आ सकती हो तो मनीषा ने कहा हां क्यों नहीं। मनीषा के पास मैंने अपने रूम की चाबी दी हुई थी तो मनीषा ने मेरा पर्स ले लिया और वह एयरपोर्ट आ गई। उसने मुझे मेरा पर्स दिया और मुझे कहने लगी कि गौतम तुम बहुत ही लापरवाह हो गए हो तुम्हें यह भी याद नहीं था कि तुम्हारा पर्स घर पर ही रह गया है।

मैंने मनीषा को कहा कि मैं तुम्हें थैंक्यू कहना चाहता हूं यदि तुम समय पर नहीं आती तो शायद मेरा पर्स घर ही छूट जाता और मुझे बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता क्योंकि पर्स में ही मेरा सारा सामान था और मेरे पास पैसे भी नहीं थे। मनीषा ने मुझे कहा कि गौतम जब तुम मुंबई पहुंच जाओगे तो मुझे फोन करना मैंने मनीषा को कहा ठीक है जब मैं मुंबई पहुंच जाऊंगा तो मैं तुम्हें फोन करूंगा। जब मैं मुंबई पहुंच गया तो मैंने मनीषा को फोन किया मनीषा से मेरी काफी देर तक बात हुई और हम दोनों ने एक दूसरे से बहुत देर तक बातें की। मनीषा जिस तरीके से मुझ पर अपना हक जताती थी वह मुझे बहुत अच्छा लगता और मनीषा को भी मेरे साथ काफी अच्छा लगता लेकिन मनीषा को मैं अपने दिल की बात कह नहीं पाया था। मैं मनीषा को अपने दिल की बात कह नहीं पाया था मैं चाहता था कि मैं मनीषा को अपने दिल की बात कह दूं लेकिन मैंने अभी तक मनीषा को अपने दिल की बात नहीं कही थी। एक दिन मैंने जब मनीषा को इस बारे में कहने की सोची तो उस दिन मैं मनीषा को कुछ कह ना सका मेरे अंदर हिम्मत ही नहीं हुई कि मैं मनीषा को अपने दिल की बात कह सकूं। मेरे दिल में यह बात दबी की दबी रह गई थी कि मैं मनीषा को प्यार करता हूं। मैं मनीषा को बहुत प्यार करता हूं यह बात मै मनीषा को कह नहीं पाया था। एक दिन मनीषा बहुत ज्यादा परेशान थी मैंने मनीषा को कहा तुम इतनी परेशान क्यों हो? उस दिन मुझे मनीषा ने बताया उसने रोहित से अपने दिल की बात कही थी लेकिन उसने उसे मना कर दिया।

मनीषा को काफी अकेलापन महसूस हो रहा था मैंने मनीषा को कहा तुम ठीक तो हो। मैंने मनीषा के कंधे पर हाथ रखा और मनीषा मेरी बाहों में आ गई। मैं मनीषा को अपनी बाहों में लेकर बहुत ज्यादा खुश था। मनीषा के स्तन मेरी छाती से टकराने लगे थे। मैंने मनीषा को समझाने की कोशिश और कहा मैं तुम्हारे साथ हमेशा हूं। इस बात से मनीषा भी खुश हो गई अब मेरा हाथ मनीषा की गांड की तरफ बढ़ने लगा मैंने उसकी गांड को दबा दिया। मनीषा को अच्छा लगने लगा था। मनीषा ने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया था। मनीषा मेरे होठों को जिस तरीके से चूम रही थी उससे मुझे मजा आने लगा था और मनीषा को भी बड़ा अच्छा लग रहा था। हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे ना तो मैं अपनी गर्मी को रोक पा रहा था ना मनीषा अपने अंदर की गर्मी को रोक पा रही थी। हम दोनों बहुत ज्यादा तड़पने लगे थे मेरी गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ने लगी। अब मैंने अपने लंड को बाहर निकाला। मेरा लंड देखकर मनीषा ने उसे अपने हाथों में ले लिया और वह पहले तो शर्मा रही थी। मनीषा ने मेरे लंड को अच्छी तरीके से सहलाना शुरू कर दिया था। मुझे बहुत ही ज्यादा अच्छा लग रहा था जब मैं और मनीषा दूसरे की गर्मी को बढ़ा रहे थे। मनीषा ने मेरे लंड को अपने मुंह में ले लिया और उसे बड़े अच्छे तरीके से चूसने लगी। जिस तरीके से वह मेरे लंड को सकिंग कर रही थी उससे मेरी गर्मी पूरी तरीके से बढ़ती जा रही थी और मनीषा की गर्मी भी अब काफी ज्यादा बढ़ चुकी थी। वह बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी मैंने मनीषा के बदन से कपड़े उतार दिए थे।

मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू किया उसके स्तनों को मैं जिस तरीके से चूस रहा था उस से उसकी इच्छा पूरी हो रही थी। मैं उसके स्तनों को अच्छे से चूस रहा था। मैं उसके स्तनों को जिस तरीके से चूस रहा था वह बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी। वह मुझे कहने लगी मेरी गर्मी को तुमने बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। मैंने मनीषा की गर्मी को इस कदर बढ़ा दिया था वह बिल्कुल भी रह नहीं पा रही थी और ना ही मैं अपने आपको रोक पा रहा था। मैंने मनीषा की योनि को तब तक चाटा जब तक मनीषा को मजा नहीं आ गया था। मनीषा की चूत से निकलता हुआ पानी देखकर मैं बहुत ज्यादा गर्म हो चुका था। मैंने अपने लंड को मनीषा की चूत पर लगाया मेरा लंड मनीषा की चूत में जाने को तैयार हो चुका था। मैने धीरे-धीरे अपने मोटे लंड को मनीषा की योनि में प्रवेश करवाया। मनीषा की चूत में मेरा लंड प्रवेश हो चुका था मनीषा की योनि के अंदर जैसे ही मेरा लंड घुसा तो मनीषा जोर से चिल्लाई और बोली मेरी चूत से खून निकलने लगा है। मैंने मनीषा के दोनों पैरों को चौड़ा किया हुआ था। मैंने बिस्तर पर देखा तो मनीषा की चूत से खून निकल रहा था। मनीषा जिस मादक आवाज में सिसकारियां ले रही थी वह मुझे मजा दे रही थी। उसे बहुत ज्यादा मजा आने लगा था। मैं और मनीषा एक दूसरे की गर्मी को बढ़ाए जा रहे थे। हम दोनों एक दूसरे की गर्मी को इतना बढा चुके थे अब उसे रोक पाना बहुत ही मुश्किल था।

मैंने मनीषा के दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और मनीषा की चूत के अंदर बाहर मै लंड को डाले जा रहा था। वह बहुत जोर से सिसकारियां ले रही थी उसकी योनि से खून लगातार बाहर की तरफ आ रहा था। मैं समझ चुका था मनीषा अब झडने वाली है। मैंने मनीषा की चूत के अंदर अपने माल को गिरा दिया था। उसके बाद मैं और मनीषा एक दूसरे के साथ बड़े खुश थे। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ शारीरिक सुख का जमकर मजा लिया था। मनीषा और मै जब भी साथ में होते तो हम दोनों को बहुत अच्छा लगता। हम दोनो सेक्स संबंध बना लिया करते थे। मनीषा भी मुझे प्यार करने लगी थी और मैं इस बात से बहुत ज्यादा खुश था कि मनीषा मुझे प्यार करने लगी है।



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