जीवन का मजा सेक्स में


Antarvasna, hindi sex story: मैंने जब ऑफिस ज्वाइन किया तो उस वक्त मुझे कविता मिली कविता के साथ मुझे काफी अच्छा लगने लगा। हम दोनों की जॉइनिंग एक ही दिन हुई थी इसलिए हम दोनों की अच्छी दोस्ती होती चली गईं लेकिन कविता ने मुझे अपने परिवार के बारे में कभी बताया नहीं था। एक दिन मैं और कविता साथ में थे उस दिन कविता ने मुझे अपने परिवार के बारे में बताया, उसने मुझे अपने पिताजी के बारे में बताया कि उसके पिता बहुत ही शराब पीते हैं और वह इस वजह से काफी परेशान भी रहती है। मैंने कविता को कहा देखो कविता तुम्हे परेशान होने की जरूरत नहीं है तुम्हारे जीवन में जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन मुझे क्या पता था कि कविता की जिंदगी में मेरा बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होगा और कविता और मैं एक दूसरे के इतने करीब आ जाएंगे की कविता मेरे बिना जैसे अपने आप को अधूरा सा महसूस करेगी। कविता को कभी भी कोई जरूरत होती तो सबसे पहले वह मुझे ही कहती और मैं भी कविता कु मदद के लिए हमेशा ही तैयार रहता। कविता एक दिन मुझे कहने लगी कि संजय आज मैं तुम्हें अपनी मम्मी से मिलवाती हूं, कविता अपनी मम्मी को बहुत प्यार करती है।

वह मुझे कहने लगी कि मुझे तुम्हें अपनी मम्मी से मिलवाना है और जब उसने उस दिन मुझे अपने परिवार से मिलवाया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। हालांकि उस दिन कविता के पापा घर पर तो नहीं थे लेकिन कविता की बहन घर पर थी और कविता की बहन और मम्मी से मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा। कविता ने उनके सामने मेरी बहुत तारीफ की जिससे कि वह लोग मुझे कहने लगे कि बेटा कविता तो अक्सर तुम्हारी तारीफ करती ही रहती है। मैंने उन्हें कहा कि आंटी कविता बहुत ही अच्छी है और यह तो उसका बड़प्पन है कि वह मेरी तारीफ करती है। कविता और मैं एक दूसरे के साथ काफी खुश थे और हम दोनों की दोस्ती बहुत ज्यादा गहरी होती चली गई लेकिन मुझे क्या पता था कि एक समय ऐसा आएगा जब कविता और मैं एक दूसरे के लिए इतना सोचने लगेंगे कि मैं कविता के बिना रह ही नहीं पाऊंगा। मुझे यह एहसास उस वक्त हुआ जब कविता के लिए उसके परिवार वाले लड़का देखना शुरू कर चुके थे उस वक्त मैं सोचने लगा कि क्या मैं कविता से प्यार करता हूं।

एक दिन मैं इस बारे में कविता से बात करना चाहता था मैं चाहता था कि मैं कविता से इस बारे में बात करूंगा। मैंने कविता से इस बारे में बात की उस वक्त कविता और मैं एक दूसरे के साथ थे उस दिन हम दोनों ऑफिस से फ्री होने के बाद एक साथ थे और हम दोनों एक साथ अच्छा समय बिता रहे थे। मैं कविता के साथ तो हमेशा ही अच्छा समय बिताता हूं और मुझे उसके साथ अच्छा भी लगता है। कविता मुझे कहने लगी की संजय मैं तुम्हें बहुत पसंद करने लगी हूं और ऐसा लगने लगा है जैसे तुम्हारे बिना मेरा जीवन अधूरा है मैंने कविता को कहा कि मुझे भी ऐसा ही लगता है। अब हम दोनों ने अपने रिलेशन की शुरुआत कर दी थी कुछ समय तक हम दोनों का रिलेशन अच्छे से चलता रहा लेकिन जब हमारे ऑफिस में आकांक्षा आई तो आकांक्षा की वजह से हम दोनों की जिंदगी में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था। आकांक्षा ना जाने कविता को मेरे बारे में क्या कहती जिससे की कविता और मेरे बीच हमेशा ही झगड़े होने लगे थे आकांक्षा की वजह से हम दोनों के बीच इतने झगड़े हो चुके थे कि अब ऐसी नौबत आ चुकी थी कि मैं कविता से बात तक करना नहीं चाहता था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर आकांशा को मेरे और कविता के रिलेशन से क्या प्रॉब्लम थी लेकिन उसका स्वभाव ऐसा ही था इसलिए वह कविता को मेरे बारे में ना जाने क्या कुछ कहती। एक बार तो उसने कविता से कहा कि मेरा और हमारे ऑफिस में काम करने वाली संजना के बीच अफेयर चल रहा है जिस वजह से कविता मुझसे बहुत नाराज हो गई थी। हालांकि मैंने उस वक्त कविता को समझा दिया था, संजना ने भी कविता को समझाया और कहा कि देखो कविता तुम आकांक्षा से दूर ही रहा करो। आकांक्षा की जिंदगी में कुछ भी ठीक नहीं था क्योंकि आकांक्षा का रिलेशन टूट चुका था इसलिए वह चाहती थी कि मेरा और कविता का रिलेशन भी ना चले। आकांक्षा ने हमारे रिलेशन को तोड़ने में कोई भी कमी नहीं रखी थी लेकिन मैं कविता से दूर होना नहीं चाहता था मैं चाहता था कि कविता और मैं जल्द ही एक दूसरे से शादी कर ले।

मैंने उस दिन कविता से बात करने का फैसला कर लिया था काफी दिन हो गए थे हम दोनों के बीच बातें भी नहीं हो रही थी क्योंकि कविता और मेरे बीच कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था। उस दिन मैंने कविता को समझाया और कहा कि कविता देखो मैं तुमसे प्यार करता हूं और तुम्हारे बिना मेरे जीवन में बिल्कुल भी खुशियां नहीं है कविता भी कहने लगी कि संजय मुझे भी मालूम है। मैं चाहता था कि हम दोनों के बीच जितनी भी गलतफहमी है उसे मैं दूर करूं। मैंने कविता को इस बारे में समझाया तो कविता भी मेरी बात अब समझ चुकी थी और हम दोनों का रिलेशन बहुत ही अच्छे से चलने लगा था। हम दोनों के बीच सब कुछ ठीक हो चुका था शायद मुझे जीवन में कभी इतनी खुशी नहीं हुई थी जितनी मुझे उस वक्त हुई जब आकांशा ने ऑफिस छोड़ दिया था। आकांक्षा हमारे जीवन से दूर जा चुकी थी मेरे और कविता के बीच सब कुछ ठीक हो चुका था अब हम दोनों का रिलेशन पहले की तरह ही चलने लगा था। हम दोनों को करीब एक साल हो चुका था और इस एक साल में हम दोनों के बीच बहुत ही उतार चढ़ाव आए लेकिन मैं चाहता था कि कविता और मैं एक हो जाएं। मैंने कविता से कहा कि क्या हम लोगों को अब शादी कर लेनी चाहिए या हम लोगों का अपना रिलेशन चलने देना चाहिए।

मैंने अब सारी की सारी बात कविता पर ही छोड़ दी थी कविता भी चाहती थी कि हम दोनों शादी कर ले मैंने कविता की बात मान ली और कविता से शादी करने का फैसला कर लिया कविता भी इस बात से खुश थी और मैं भी बहुत खुश था। कविता के भी कुछ सपने थे जो कि मैं पूरे करना चाहता था, हम चाहते थे कि हम दोनों की शादी जयपुर में हो इसलिए मैंने और कविता ने जयपुर में ही शादी की। हम दोनों की शादी हो जाने के बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत ही खुश थे जब हम दोनों की शादी हो गई तो उसके बाद हम लोग घूमने दुबई गए। जब हम दोनों दुबई गए तो दुबई मे हम लोगों का टूर बड़ा ही यादगार रहा। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ खूब मजे किए फिर हम लोग घर लौटे। कविता और मैं एक दूसरे के साथ खुश है कुछ दिनो पहले हम दोनो साथ मे थे कविता कुछ ज्यादा ही उत्तेजित हो गई थी। वह मेरे लंड को अपने गले तक लेकर सकिंग करने लगी। जब वह ऐसा कर रही थी तो मुझे मजा आने लगा था और उसे भी मजा आ रहा था। कविता मुझे कहने लगी मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा है मैंने कविता से कहा तुम ऐसे ही मेरे लंड को चूसती रहो उसने बहुत देर तक मेरे मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर चूसा। जब वह मेरे लंड को अपने गले के अंदर लेकर चूस रही थी तो उसे बड़ा मजा आ रहा था और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने कविता के पैरो को खोलो और उसकी पैंटी को उतारकर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया तो कविता को बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था और उसकी चूत से निकलता हुआ पानी काफी अधिक हो चुका था। मैंने कविता से कहा मुझे तुम्हारी चूत मारनी हैं। कविता ने अपने पैरों को खोल लिया मैंने कविता की चूत के अंदर अपनी उंगली को डाला तो वह बहुत ही ज्यादा मचलने लगी थी और मुझे कहने लगी मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है।

अब हम दोनों के अंदर पूरी तरीके से गर्मी बढ़ती जा रही थी। कविता बहुत ही ज्यादा गर्म हो गई थी मैंने कविता के बदन को महसूस करना शुरू कर दिया था। मैं उसके स्तनों को चूसकर उसे पूरी तरीके से गर्म कर रहा था वह बहुत ही ज्यादा गरम हो चुकी थी। उसने मुझे कहा अब आप मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दो। मैंने कविता की योनि के अंदर लंड घुसा दिया जैसे ही कविता की चूत के अंदर लंड घुसा तो मुझे मजा आने लगा और कविता को भी बड़ा अच्छा लगने लगा था। वह मुझे कहने लगी मुझे बड़ा मजा आ रहा है। कविता को मुझे धक्के मारने में बड़ा आनंद आ रहा था और हम दोनो एक दूसरे के साथ बहुत ही अच्छे से सेक्स कर रहे थे। कविता मुझे कहने लगी मेरे अंदर की आग तुमने पूरी तरीके से बढा दी है मैंने उसे कहा मुझे बड़ा मजा आ रहा है। मैंने कविता के दोनों पैरों को चौड़ा कर दिया था जब मैंने उसके पैरों को चौड़ा किया तो उसे बड़ा आनंद आ रहा था।

मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखकर उसे बहुत ही तेजी से चोदना शुरू कर दिया। मै कविता को जिस प्रकार से चोद रहा था उस से कविता पूरी तरीके से मजे मे आने लगी। वह मुझे कहने लगी मुझे चोदते रहो कविता को मैंने डॉगी स्टाइल में बना दिया था। जब मैं उसे चोदने लगा तो वह अपनी चूतड़ों को मुझसे मिलाने लगी उसकी योनि से बहुत अधिक मात्रा में पानी निकलने लगा था। मुझे काफी ज्यादा मजा आने लगा था मेरे अंदर से निकलता हुआ ज्वालामुखी फटने वाला था मै कविता की चूत के लावे को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पाया। हम दोनों की गर्मी से जो पसीना निकल रहा था वह हम दोनों के बदन को गरम कर रहा था। वह बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी मैंने कविता को कहा मेरा माल गिरने वाला है। मैंने अपने माल को गिरा दिया उसके बाद मैं और कविता एक दूसरे के साथ लेटे रहे। हम दोनों का जीवन बड़े अच्छे से चल रहा है कविता और मैं एक दूसरे के साथ बहुत खुश है। हम दोनों एक दूसरे की हर एक जरूरतों को पूरा करते हैं और सेक्स को लेकर वह मुझे कभी कोई कमी होने ही नहीं देती।


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